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सत्र न्यायाधीश के आश्वासन के बाद भी महरौनी कोर्ट में जजों की नहीं हो सकी नियुक्ति, बार संघ ने फिर दी चेतावनी

महरौनी अधिवक्ताओं की 16 अक्टूबर से कलम बन्द हड़ताल एवं 31 अक्टूबर से होगी तालाबंदी

महरौनी / ललितपुर

मामले लटके अधर में न्यायिक व्यवस्था ध्वस्त होने के विरोध में बार संघ विगत दो माह में लगभग 12 दिन की हड़ताल कर चुका है परंतु आश्वासन के बाद भी जजों की नियुक्ति नहीं हो सकी इसके लिए बार संघ एक बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहा है । विगत दिवस बार संघ की एक बैठक तहसील कार्यालय में आयोजित की गई जिसमें उच्च अधिकारियों को ज्ञापन के माध्यम से अंतिम चेतावनी दी गई ।इस दौरान अधिवक्ताओं ने बताया कि तहसील में न्यायिक व्यवस्था पूर्णतः बेपटरी हो गयी हैं। जिससे क्षेत्रवासियों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं। ए सी जे एम एवं जूनियर डिवीजन न्यायालय में पिछले 6 माह से कोई पीठासीन अधिकारी तैनात नहीं हैं।  बैठक में समस्या का समाधान न होने पर सभी अधिवक्ताओं ने कड़ा विरोध जताया और तीन दिन हड़ताल करने का ऐलान कर दिया।

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न्यायालयों में पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने के कारण अधिवक्ताओं में काफी आक्रोश दिखाई दिया। बार संघ महामंत्री लोकपाल सिंह ने कहा कि न्यायालयों में लंबे समय से पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति न होने से वादकारियों को काफी परेशान होना पड़ रहा है तथा न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है। विगत दो माह में बार संघ 12 दिन की हड़ताल कर चुका है । परंतु अभी तक जजों की नियुक्ति नहीं होने के कारण बार संघ आंदोलन करने के लिए बाध्य हो रहा है । इस माह में 16 से 18 अक्टूबर, 27 अक्टूबर से 29 अक्टूबर को हड़ताल रहेगी और यदि फिर भी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 31 अक्टूबर से अनिश्चितकाल के लिए न्यायालय की तालाबंदी रहेगी। जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी न्याय विभाग की होगी । अधिवक्ताओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं। उन्होंने कहा कि जिला एवं सत्र न्यायाधीश को ज्ञापन के माध्यम से इस समस्या को प्रशासनिक न्यायमूर्ति उच्च न्यायालय के समक्ष रखा गया था । लेकिन उसके बावजूद दोनों न्यायलयों में पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति नहीं हो सकी। बार संघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि हमारी मांग पर गंभीरतापूर्वक विचार नहीं किया गया। अधिवक्ताओं की इस हड़ताल से क्षेत्र के लोगों को और भी खासी समस्या का सामना करना पड़ेगा। बैठक में प्रेमनारायण सोनी, शत्रुघन सिंह तोमर, हरप्रशाद प्रजापति, प्रकाश नारायण सोनी, ज्ञानेंद्रसिंह, अकबर खां, सरफराज अली, इरशाद अली, सुंदर लाल कुशवाहा, गजराजसिंह, कालका प्रसाद यादव, इंद्रभनसिंह, रामबिलास खरे, राकेश शर्मा, देवेंद्र सिंह,कृष्ण कुमार सोनी, अखलेश दीक्षित, दिनेश झा, कुलदीप खरे, प्रह्लाद सिसोदिया, अमृत झा, अनिल दीक्षित, नंदकिशोर पाल, गुलझार सिंह, मुहम्मद खां, सुरेंद्र तिवारी, आशीष मोदी, राकेश बिहारी वैध, राजेंद्रसिंह सिसोदिया, कृष्ण प्रतापसिंह, पूरन सिंह तोमर, सूर्यप्रताप सिंह, दृगपालसिंह, किशन सिंह, राकेश सर्राफ, ब्रजेश त्रिपाठी, सूर्यप्रताप सिंह जमीदार, बहादुरसिंह परमार, अजय पांडेय, रामपलसिंह, राजेंद्र श्रीवास्तव, रतिराम कुशवाहा, जे. के. सोनी, रईस अहमद सिद्दकी, नरेंद्रसिंह, विजय कुमार, शिवलाल अहिरवार, रूपेश उपाध्याय, रामकुमार नायक, आदि अधिवक्ता उपस्थित रहे।

 

  • रिपोर्ट- आर के पटेल
  • ललितपुर
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