ग्रामीणों ने शीशम और महुआ के हरे पेड़ काटने वालों के खिलाफ जिलाधिकारी को प्राथना पत्र देकर कार्यवाही करने की मांग,
ग्रामीणों ने शीशम और महुआ के हरे पेड़ काटने वालों के खिलाफ जिलाधिकारी को प्राथना पत्र देकर कार्यवाही करने की मांग,

ललितपुर (उत्तर प्रदेश)
शाशन प्रशासन एक ओर जहाँ लाखों करोड़ों रुपये खर्च करके प्रतिवर्ष पौधारोपण का कार्यक्रम करबाते है, जिससे पर्यावरण दूषित न हो वायुमंडल स्थिर बना रहे बड़ रहे प्रदूषण व हो रही अत्यधिक भीषण गर्मी से बचने के लिये पेड़-पौधों के संरक्षण पर सरकार व प्रशासन पुरजोर तरीके से कार्य कर रहे है। तो वहीं जनपद में ऐसे भी है जो इस मंशा ठीक विपरीत उन्हें पर्यावरण व पेड़-पौधे संरक्षण से कोई सरोकार नही है। उनकी दुनिया अपनी है उसी मंशा से महरौनी कोतवाली के अंतर्गत ग्राम जखौरा में काटे जा रहे महुआ औऱ शीशम के हरे भरे पेड़,
वन विभाग भी बार-बार अवगत कराने के बाबजूद कुम्भकर्णीय निद्रा में है। ग्रामीणों ने की शीशम और महुआ के पेड़ काटने वालों के खिलाफ जिलाधिकारी से कार्यवाही की मांग। बेशकीमती व प्रकृति को हरा-भरा रखने वाले शीशम और महुआ के कटे पेड़ों की ग्रामीण द्वारा बीडियो बना हुआ है, जब ग्रामीण मौके पर गए तो ग्रामीणों को देख पेड़ काटने वाले भाग गये। आपको बता दे कि अभी भी महुआ औऱ शीशम के कटे पेड़ मौक़े पर पड़े हुए है। लेकिन अभी तक वन विभाग का कोई भी कर्मचारी मौक़े पर नही पहुंचा है। प्राप्त समाचार के अनुसार महरौनी स्थित एक आरा मशीन संचालक द्वारा यह शीशम औऱ महुआ के पेड़ बिना किसी स्वीकृति के काट डाले है। अब यह लोग काटे गए अबैध पेड़ों को उठाने के लिए पड़े स्थित जगह के इर्द-गिर्द गिद्ध की भाँति भटक रहे है। लोगों ने बताया कि पेड़ काटने व आरा मशीन संचालक की वन विभाग के अधिकारियों से मिली भगत होने से यह लोग दिन दहाड़े हरे प्रतिबंधित पेड़ काट रहे है औऱ वन विभाग कार्यवाही करने में कुताही बरत रहा है। अब सवाल उठता है कि ऐसे ही प्रतिबंध हरे-भरे पेड़ कटते जाएंगे तो प्रकृति से खिलवाड़ का दुष्परिणाम सभी को भुगतान करना पड़ेगा।


रिपोर्ट- आर के पटेल ललितपुर #samachartak #LaharLive24news



