
कटिहार (बिहार)
मनरेगा का नाम बदलने के प्रस्ताव के विरोध में कांग्रेस ने जिला कार्यालय राजेंद्र आश्रम में प्रेसवार्ता कर केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधा। कांग्रेस नेताओं ने इसे ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और सामाजिक न्याय की भावना पर हमला बताया।
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुनील कुमार यादव ने कहा कि मनरेगा कोई साधारण योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के रोजगार और अधिकार से जुड़ा एक कानून है। महात्मा गांधी का नाम इससे जुड़ा होना इसकी आत्मा और मूल भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि नाम बदलने के बजाय सरकार को बजट बढ़ाने, मजदूरी दर में सुधार और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए।
अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष प्रदीप पासवान ने आरोप लगाया कि इस कदम के जरिए केंद्र सरकार ग्राम सभा और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भूमिका को कमजोर करना चाहती है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिलीप बिश्वास ने कहा कि मनरेगा के नाम में बदलाव का फैसला मजदूरों के हितों के खिलाफ है और इससे ग्रामीण श्रमिकों को सीधा नुकसान होगा।
आदिवासी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. बिपिन सिंह ने कहा कि मनरेगा में 60 प्रतिशत राशि केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य सरकार को वहन करनी होती है। बिहार जैसे गरीब राज्य के लिए इतनी बड़ी राशि जुटाना कठिन है, जिससे योजना के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में मनरेगा का नाम बदलने के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की और इसे गरीब विरोधी निर्णय करार दिया।
इस मौके पर जिला प्रवक्ता पंकज तम्बाकूवाला, प्रहलाद गुप्ता, प्रो. विनोद यादव, महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष श्रीमती आम्रपाली यादव उर्फ अंजुमन कौसर, गौरव सिंह, सऊद मुखिया सहित कई कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
🖋️ प्रीतम चक्रवर्ती
पूर्णिया प्रमंडल प्रभारी
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