
कटिहार (बिहार)
सांसद पप्पू यादव ने लोकसभा में नियम 377 के तहत बिहार के सीमांचल क्षेत्र में व्याप्त गंभीर स्वास्थ्य संकट का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने पूर्णिया, किशनगंज, अररिया और कटिहार जिलों की स्वास्थ्य व्यवस्था को बदहाल बताते हुए केंद्र सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया।
सांसद ने सदन में कहा कि सीमांचल के अधिकांश जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों, प्रशिक्षित नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ, आईसीयू और एनआईसीयू सुविधाओं, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों तथा पर्याप्त बेड की भारी कमी है। इसके कारण मरीजों को सामान्य बीमारियों से लेकर आपातकालीन स्थितियों तक में पटना और अन्य महानगरों का रुख करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि इलाज के लिए बाहर जाने की मजबूरी गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर भारी आर्थिक और मानसिक बोझ डाल रही है। सीमांचल की जनता को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
सांसद पप्पू यादव ने निजी अस्पतालों और कुछ डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई मामलों में गलत इलाज और लापरवाही से मरीज की मृत्यु के बाद भी परिजनों से जबरन शुल्क वसूला जाता है। कुछ मामलों में शव तक को रोके जाने की घटनाएं सामने आती हैं, जो पूरी तरह अमानवीय हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि अनावश्यक जांच और महंगे पैकेज थोपकर खुलेआम आर्थिक शोषण किया जा रहा है। सांसद ने इसे चिकित्सा धर्म और चिकित्सकीय आचार संहिता का घोर उल्लंघन बताया।
सांसद ने सरकार से मांग की कि सीमांचल के जिला अस्पतालों को क्षेत्रीय रेफरल केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए विशेष योजना बनाई जाए। इसके साथ ही निजी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और पारदर्शी शुल्क नियंत्रण के साथ सख्त जवाबदेही तंत्र लागू किया जाए।
इसके अतिरिक्त सांसद पप्पू यादव ने पूर्णिया में केंद्रीय स्तर का एक सुपर स्पेशलिटी मेडिकल संस्थान स्थापित करने की भी मांग की, ताकि सीमांचल की जनता को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और मानवीय स्वास्थ्य सेवाएं अपने ही क्षेत्र में उपलब्ध हो सकें।
रिपोर्ट – प्रीतम चक्रवर्ती
प्रमंडल प्रभारी
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