श्री दीपचंद्र नाम का स्कूल शिक्षा का मंदिर नहीं, छात्र के लिए बना बंदी गृह
एसडीपीएस में मासूम छात्र को दी तालिबानी सजा, बेरहमी से पिटाई के बाद स्कूल अध्यापक ने कमरे में किया बंद, विद्यालय स्टाफ पर लगाये कई गम्भीर आरोप

ललितपुर (उत्तर प्रदेश)
बेबुनियाद चोरी के आरोप में स्कूल की शिक्षका ने न सिर्फ 11 बर्षीय बच्चे को मारा-पीटा बल्कि उसको बंद कमरे में रखकर कारावास जैसी सजा तक दे डाली। इस व्यवहार से आक्रोशित परिजनों ने पुलिस अधीक्षक के दफ्तर में बच्चे को लेकर पहुंचे और तहरीर दी। जिसमें बच्चे कृष्ण प्रताप सिंह बुंदेला के पिता भगवत सिंह पुत्र देवी सिंह निवासी चौकाबाग, नरसिंह विद्या मंदिर के पास ने बताया की प्रार्थी का बच्चा एसडीपीएस में कक्षा 6 में पड़ता है, रोज की तरह सोमवार को भी स्कूल गया था। करीब 12 बजे दोपहर लंच के दौरान स्कूल के ही शिक्षका आयुषी ने कोर्स दिलाने के बहाने कमरे में ले गयी। वहाँ पहले से ही मौजूद वैशाली ओर दो अन्य युवक थे। आरोप लगाया कि कमरे के अंदर बेबजह बच्चे के साथ घंटों मारपीट की गयी और बीस हजार रुपये चोरी करने की बात कबूल करने को कहा जब बच्चे ने मना किया तो बच्चे का गला दबाते हुए जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि चोरी कबूल करो नही तो जान से मार देंगे। डर-भय व पीटने से बचने के लिये बच्चे ने चोरी को कबूल कर लिया। जब बच्चा बेबजह चोरी को कबूल कर रहा था तो मौजूदा दो अन्य लोगों ने इसका सारा वीडियो बना लिया। और धमकी दी कि अगर किसी से बोला कि वीडियो बनाई तो एफआईआर करवा कर स्कूल से नाम काट देंगे। आगे बताया कि जब प्रार्थी का बच्चा समय से घर नही पहुंचा तो प्रार्थी की बच्ची सोनिका को स्कूल भेजा। जब बच्चे की बहिन ने विद्यालय स्टाफ से कहा कि अभी तक मेरा भाई घर क्यों नही पहुँचा तो जबाब मिला कि तुम्हारे भैया ने चोरी की है और वह कमरे में बंद है, उसने प्रबंधक से शिकायत का बोला तो तमाम स्टाफ ने सोनिका के साथ भी बत्तमीजी भी की। और स्कूल में ही बैठा लिया और स्टाफ ने कहा कि घर फोन लगाओ और बीस हजार रुपये लाने के लिए बोलो तभी यहाँ से जाने देंगे अन्यथा पुलिस के हवाले कर देंगे। तत्पश्चात सोनिका ने घर फोन किया और सारी बात बताई। तो घर पर प्रार्थी के न होने से स्कूल में प्रार्थी के साडू व बच्चे के मौसा गया। इसके पहले ही स्कूल स्टाफ ने डायल 112 पर पुलिस को सूचना कर दी। प्रार्थी ने कहा कि उसके साडू के साथ भी अभद्रता करते हुए बीस हजार रुपये की मांग की। और साडू अरविंद ने पुलिस के सामने ही 20175 रुपये उनके बताए अनुसार दे दिए साथ ही बच्चे का नाम काटकर टीसी पकड़ा दी। और धमकी दी कि चुपचाप निकल जाओ वरना झूठे मुकदमे में जेल भिजवा देंगे। आरोप लगाया कि प्रार्थी का बच्चा अभी भी घबराया व सहमा हुआ है। और शरीर मे काफी चोटें है। पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि प्रबंधक व स्कूल शिक्षका के साथ अन्य स्टाफ पर मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्यवाही की जाए।
क्या कहता है कानून –
अगर टीचर आपके बच्चे को मार दे तो क्या करें ?
ऐसे मामलों में विशेष रूप से शिक्षक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और स्कूल के खिलाफ बच्चों के प्रति क्रूरता के खिलाफ राज्य कानून की संबंधित धारा का आरोप लगाते हुए तुरंत पुलिस शिकायत दर्ज करें (और संबंधित स्कूल अधिकारियों को एक प्रति दें)
स्कूल अध्यापकों को क्या है दंडित का अधिकार –
छात्र से माफीनामा लिखने को कहें। उन्हें पंक्तियाँ देने के बजाय, उन्हें कक्षा से अपने नोट्स पुनः प्राप्त करने के लिए कहें। उन्हें अतिरिक्त होमवर्क दें। उनके अवकाश का समय कम करें (स्कूल के अनुशासनात्मक कोड के आधार पर) या उन्हें पुरस्कार से वंचित करें।
जाने क्रूर अध्यापकों को क्या है कड़ा कानून –
शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत धारा 17 बच्चों पर शारीरिक दंड को पूरी तरह से प्रतिबंधित करती है, और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत सजा पांच साल तक की कठोर कारावास और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना होगा।
रिपोर्ट- आर के पटेल ललितपुर (उत्तर प्रदेश) #samachartak #LaharLive24news



