Uttar Pradesh ; दुष्कर्म मामले में हाईकोर्ट सख्त, अधिवक्ता सुनील चौधरी की दलीलों का असर
शादी का झांसा देकर शोषण के आरोप में पुलिस कांस्टेबल को राहत नहीं, जांच के आदेश

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)
शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के गंभीर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी पुलिस कांस्टेबल को राहत देने से इनकार कर दिया। इस पूरे मामले में पीड़िता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सुनील चौधरी की प्रभावी दलीलों ने सुनवाई को निर्णायक मोड़ दिया।
क्या है पूरा मामला
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि अयोध्या में तैनात पुलिस कांस्टेबल अनुज कुमार ने नाबालिग अवस्था में उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोप है कि शादी का झांसा देकर कई वर्षों तक उसका शोषण किया गया।
पीड़िता के अनुसार वर्ष 2020 में पहली घटना हुई। इसके बाद कई बार दुष्कर्म किया गया और गर्भवती होने पर जबरन गर्भपात भी कराया गया।
अधिवक्ता सुनील चौधरी की भूमिका बनी अहम
पीड़िता की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने अदालत में मजबूत और तथ्यों पर आधारित पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट के समक्ष स्पष्ट किया कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से पीड़िता को झांसे में लेकर उसका शोषण किया।
अधिवक्ता चौधरी ने यह भी उजागर किया कि आरोपी द्वारा पीड़िता और उसके परिवार पर दबाव बनाने के लिए फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए। उन्होंने अदालत को बताया कि पीड़िता के खिलाफ दाखिल विवाह संबंधी मुकदमा भी निराधार था, जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया।
फर्जी मुकदमों की साजिश पर उठाए सवाल
अधिवक्ता सुनील चौधरी ने बहस के दौरान यह भी बताया कि पीड़िता के पिता को झूठे मामले में फंसाने की कोशिश की गई, जो न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण है। इस तर्क ने मामले को और गंभीर बना दिया।
हाईकोर्ट का सख्त रुख
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने आरोपी को कोई राहत नहीं दी और बाराबंकी पुलिस अधीक्षक को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
साथ ही निचली अदालत को मामले में आगे की कार्रवाई जारी रखने का आदेश दिया गया है। अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।
रिपोर्ट – समाचार तक
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