
ललितपुर (उत्तर प्रदेश)
अपनों ने छोड़ा पर सरकार व संस्था के सहयोग से वृद्धों को सहारा एवं दो वक्त की रोटी मुनासिब हुई। वृद्ध आश्रमों की बढ़ती संख्या के लिए समाज में बदलते मूल्य, संस्कार और आर्थिक मजबूरियां हैं। संयुक्त परिवार टूटने के बाद घर के वृद्धों को संभालने के लिए परिवार में सदस्य ही नहीं है। संयुक्त परिवार एक तरह से इंश्योरेंस का काम करते थे और वे परिवार में वृद्ध रोगी और आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों की सहायता करते थे। ऐसा ही भारत सरकार की मदद से महरौनी में वृद्ध आश्रम खोला गया था। जिसका संचालन जीपी एजुकेशनल एन्ड रिसर्च सोसाइटी जो कि थरविहार करछना प्रयागराज की संस्था कर रही थी। इस संस्था ने भारत सरकार की मदद से 2020 में आश्रम खोला था। जिसको दो-तीन बर्ष तो सही चलाया जिसमे तैनात स्टाफ का वेतन, राशन व्यापारी, मेडकिल स्टोर से लेकर दूध वाला और भवन स्वामी का बराबर समय पर भुगतान कर दिया जाता था। लेकिन विगत 17 माह से इन सभी वेतन व बिल भुगतान नही किया गया है। एवज ने संस्था यह वृद्ध आश्रम छोड़कर भाग गई है। इसी के खिलाफ आश्रम में तैनात मैनेजर व समस्त स्टाफ ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत पत्र सौंपकर उन्हें सारी समस्याओं से अवगत कराया बताया गया कि जब यह आश्रम खोला गया तो संस्था के संचालक द्वारा भवन स्वामी से अनुबंध पत्र लिखा गया था जिसमें प्रतिमाह तीस हजार रुपये देने की बात हुई थी। और आश्रम में तैनात सेवादार, आंकिक योगा, मैनेजर सहित 12 कर्मचारियों का स्टाफ था। जिसको समय से वेतन देने की भी बात हुई थी लेकिन विगत 17 माह से इन्हें कोई वेतन मुहैया नही कराई गई। अब ऐसे में इनका घर का खर्च कैसे चलता होगा। बताते चले कि कुछ माह पूर्व इनका बिल भुगतान व वेतन देने के लिए रवैया ठीक सा नही रहा और यह हर बार बिलम्ब करते जाते थे। संचालक द्वारा आधा अधूरा पेमेंट होने लगा जबकि कर्मचारियों व भवन स्वामी द्वारा बोला गया कि आपका तो प्रतिवर्ष बजट आ जाता लेकिन हम लोगों को क्यों जानबूझकर परेशान किया जाता। जिसको लेकर आश्रम में तैनात कर्मचारी व भवन स्वामी ने समाज कल्याण अधिकारी एवं जिलाधिकारी से शिकायत की तो उससे घबराकर उन्होंने कुछ पैसा दिया। लेकिन शिकायत से खफा होकर संचालक द्वारा कई बार भवन स्वामी एवं कर्मचारियों से गाली-गलौच करते नजर आए। और आगे आरोप लगाया कि उक्त संचालक द्वारा धमकी दी गयी कि अब आगे से कोई पैसा नही मिलेगा और न ही अब कोई भुगतान होगा। और अब दूसरी बजग आश्रम खोलूंगा। इसी क्रम में इनके द्वारा 16 अगस्त को मैनेजर ओल्ड एज होम महरोली के फोन में एक पीडीएफ आश्रम संचालक के भाई के द्वारा भेजा गया था। जो कि एडिट स्कूल में सरकारी लिपिक है। पीडीएफ द्वारा जानकारी हुई है कि वृद्ध आश्रम बंद किया गया है, ओर तालबेहट में खोला गया है। 17 माह का हिसाब किये बगैर तालबेहट में वृद्ध आश्रम खोलना यह प्रदर्शित करता है कि अब किसी का पैसा नही मिलना है। पुलिस अधीक्षक से मैनेजर सहित कर्मचारियों ने सभी का वेतन एवं भवन स्वामी का किराया, राशन, मेडिकल स्टोर के साथ दूध इत्यादि का 20 लाख रुपये का भुगतान कराने की मांग की है।

रिपोर्ट- आर के पटेल ललितपुर #samachartak #LaharLive24news



