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जर्सी पर Dream11, TV पर गांगुली-कार्तिक, मैदान में रोहित-धोनी; ‘दिमाग से खेलो’ कहकर बेचे सपने, अब सरकार ने किया सबको OUT,

ड्रीम-11 से लेकर विनजो और रम्मी-सर्कल तक, रियल-मनी गेमिंग ऐप्स पर सरकार का बड़ा वार, करोड़ों यूजर्स और अरबों के कारोबार का खेल खत्म

नई दिल्ली

भारत सरकार ने आखिरकार उन सभी ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स और वेबसाइट्स पर नकेल कस दी है, जो खेल के नाम पर असल में जुए और सट्टेबाज़ी का धंधा चला रहे थे। संसद से पारित ऑनलाइन गेमिंग विनियमन विधेयक 2025 के बाद सरकार ने आदेश जारी कर Dream11, MPL (मोबाइल प्रीमियर लीग), My11Circle, PokerBaazi, RummyCircle, Games24x7, WinZO, Zupee, Junglee Rummy और A23 (Ace2Three) जैसे सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म्स को बंद करवा दिया।

कई सालों से ये ऐप्स ‘फैंटेसी क्रिकेट’, ‘ऑनलाइन रम्मी’ और ‘पोकर’ के नाम पर लोगों को दांव लगाने और पैसे लगाने के लिए उकसाते रहे। नतीजा यह हुआ कि लाखों परिवार कर्ज़ में डूब गए, युवाओं की मानसिक स्थिति पर असर पड़ा और देश का एक बड़ा वर्ग जुए की लत में फँस गया।

खेल के नाम पर जुआ

Dream11 जैसे ऐप्स को हमेशा “स्किल बेस्ड गेम्स” बताया गया। विज्ञापनों में कहा जाता रहा—“दिमाग से खेलो, पैसा जीतो।” लेकिन असलियत यह थी कि करोड़ों यूजर्स की मेहनत की कमाई कुछ चुनिंदा हाथों में जाती रही। Dream11 का सालाना कारोबार 9,600 करोड़ रुपये तक पहुँच गया और इसके करीब 28 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ता थे।

इसी तरह My11Circle ने भी करोड़ों का कारोबार किया, जहाँ पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली तक को ब्रांड एंबेसडर बना लिया गया। MPL, WinZO और PokerBaazi जैसे प्लेटफॉर्म्स ने भी रम्मी, पोकर और अन्य कार्ड गेम्स के नाम पर असल में जुए की नई मंडी खोल दी।

सरकार की सख्ती

सरकार ने कहा कि इन ऐप्स से आर्थिक और मानसिक दोनों नुकसान हो रहे थे। लाखों युवाओं का करियर और भविष्य अधर में था।

नए कानून के तहत—

रियल-मनी गेमिंग ऐप्स चलाने वालों को 3 से 5 साल की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

इन पर नजर रखने के लिए राष्ट्रीय ऑनलाइन गेमिंग आयोग का गठन किया जाएगा।

सरकार का सीधा संदेश है—“खेलो जरूर, लेकिन खेल में पैसा लगाकर जिंदगी बर्बाद नहीं करो।”

सितारों पर उठे सवाल-

अब बड़ा सवाल इन ऐप्स को बढ़ावा देने वाले सेलिब्रिटी और खिलाड़ियों पर खड़ा हुआ है।

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Dream11 का चेहरा बने महेंद्र सिंह धोनी, रोहित शर्मा, हार्दिक पांड्या, ऋषभ पंत जैसे क्रिकेटर।

My11Circle का चेहरा बने सौरव गांगुली।

विज्ञापनों में कार्तिक आर्यन और सामंथा प्रभु जैसे फिल्मी सितारे भी नजर आए।

इन सितारों ने करोड़ों की फीस लेकर विज्ञापन किए और जनता को यह समझाने की कोशिश की कि यह महज एक “स्किल गेम” है। लेकिन जब सरकार खुद इसे जुए और सट्टेबाज़ी की श्रेणी में रख रही है तो सवाल उठना लाजमी है—क्या ये सितारे जनता की भावनाओं और जेब से खेलते रहे?

क्रिकेट भी घेरे में-

मामला सिर्फ विज्ञापनों तक नहीं है। Dream11 तो खुद भारतीय क्रिकेट टीम का जर्सी स्पॉन्सर बन चुका था। अब बैन के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या टीम इंडिया की जर्सी से Dream11 का नाम गायब होगा? बीसीसीआई ने साफ कहा है कि वह वही करेगा, जिसकी भारतीय कानून अनुमति देगा।

इस बैन का असर सिर्फ यूजर्स पर ही नहीं बल्कि उद्योग पर भी पड़ा है।करीब 25,000 करोड़ रुपये का निवेश दांव पर लग गया।

दो लाख से अधिक नौकरियां संकट में हैं।करीब 400 गेमिंग कंपनियां अब ठप होने की कगार पर हैं।

कंपनियां सरकार से गुहार लगा रही हैं कि यह फैसला उन्हें पूरी तरह बर्बाद कर देगा, लेकिन सरकार का जवाब साफ है—“देश की युवा पीढ़ी का भविष्य किसी कारोबार से कहीं ज्यादा अहम है।

लोगों का कहना है कि—

“जो ऐप कहते थे दिमाग से खेलो, वही अब सरकार के फैसले से मैदान से बाहर हो गए।”

“सितारों ने हमारे बच्चों को जुए में झोंका, और अब वही सितारे चुप हैं।”

“पहले ‘जर्सी’ पर लिखा था Dream11, अब शायद लिखा होगा—‘सपनों का खेल खत्म’,

भारत सरकार का यह फैसला न सिर्फ एक उद्योग पर चोट है बल्कि करोड़ों परिवारों को जुए की लत से बचाने की पहल भी है। लेकिन साथ ही यह सवाल भी छोड़ गया है—क्या सिर्फ ऐप्स को बंद करना काफी है या उन सितारों को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा, जिन्होंने इन ऐप्स को घर-घर तक पहुँचाया?

✍️ रिपोर्ट – समाचार तक
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