गिरार प्रकरण में तेज हुई कार्रवाई, जबरन वसूली के आरोप में देवेन्द्र कौशिक गिरफ्तार
भ्रामक वीडियो, धमकी और अवैध वसूली के आरोपों पर प्रशासन की कड़ी प्रतिक्रिया

ललितपुर
थाना गिरार क्षेत्र में जबरन वसूली, मारपीट और भ्रामक वीडियो प्रसारित करने के गंभीर आरोपों के बाद जिला जालौन के कोंच थाना क्षेत्र के ग्राम दिरावटी निवासी देवेन्द्र कौशिक को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त रूप से स्पष्ट किया है कि देवेन्द्र कौशिक कोई मान्यता प्राप्त पत्रकार नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर वीडियो का भय दिखाकर अवैध धन उगाही करने वाले गिरोह का सक्रिय सदस्य है।
अपर जिलाधिकारी अंकुर श्रीवास्तव एवं अपर पुलिस अधीक्षक कालू सिंह द्वारा आधिकारिक जानकारी में बताया गया कि देवेन्द्र कौशिक जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापारियों, ग्राम प्रतिनिधियों और आम नागरिकों से पैसे की मांग कर दबाव बनाता था। सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड करने की धमकी देकर वह लोगों को भयभीत करता और अवैध वसूली करता था। कई शिकायतें और दर्ज मामले पुलिस को लगातार प्राप्त हुए हैं।
गिरार क्षेत्र के डगडागी गौशाला प्रकरण में भी उसने अनाधिकृत रूप से तारबाड़ी तोड़कर प्रवेश किया, गौवंश को भगाया और ग्राम प्रधान एवं पंचायत सचिव से मारपीट की थी। जिलाधिकारी द्वारा गठित उच्च स्तरीय जांच कमेटी में गौशाला की व्यवस्थाएं सामान्य पाई गईं, लेकिन इसके बावजूद देवेन्द्र कौशिक द्वारा लगातार दुष्प्रचार और धन उगाही की कोशिशों पर कठोर कार्रवाई की गई।
एफआईआर में शामिल प्रमुख धाराएं
देवेन्द्र कौशिक के विरुद्ध थाना गिरार में मु.अ.सं. 80/2025, 81/2025 और 1361/2025 के अंतर्गत बीएनएस तथा एससी-एसटी एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए हैं। पुलिस टीम—उपनिरीक्षक धर्मेंद्र कुमार, उपनिरीक्षक आलोक कुमार और मुख्य आरक्षी कुलदीप कुमार—ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
अधिकारी क्या कहते हैं
अंकुर श्रीवास्तव, एडीएम (वि./रा.) ने कहा कि “देवेन्द्र कौशिक किसी भी प्रकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार नहीं है। वह दबाव बनाकर अवैध वसूली करने का कार्य करता था। अब उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।”
अपर पुलिस अधीक्षक कालू सिंह ने कहा कि “लोगों को भयभीत कर धन मांगने की उसकी गतिविधियां सामने आई हैं। कई मामलों में वह पहले भी चिन्हित था। उसे गिरफ्तार कर न्यायालय भेजा जा चुका है।”
रिपोर्ट – आर. के. पटेल (ललितपुर)
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