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जातीय द्वेष की आग में झुलसता समाज: सोंरई गाँव के चंदेल बुनकर समाज को मंदिर भंडारे से भगाया गया, मड़ावरा थाने में दी गई शिकायत

जातीय द्वेष की आग में झुलसता समाज: सोंरई गाँव के चंदेल बुनकर समाज को मंदिर भंडारे से भगाया गया, मड़ावरा थाने में दी गई शिकायत

ललितपुर (उत्तर प्रदेश)

एक ओर देश सामाजिक समरसता की ओर बढ़ने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। ताजा मामला मड़ावरा थाना क्षेत्र के सोंरई गांव से सामने आया है, जहां चंदेल बुनकर समाज के दर्जनों लोगों को सिर्फ उनकी जाति के आधार पर मंदिर भंडारे से यह कहते हुए जबरन भगा दिया गया कि वे “अछूत और नीची जाति” के हैं।

यह मामला तब प्रकाश में आया जब पीड़ित समाज के लोग मड़ावरा थाने पहुंचकर गांव के ही तीन लोगों – रामदास ढीमर पुत्र पूरन, राकेश पुत्र वसोरे (जाति कुम्हार), और राहुल पुत्र काशीराम नामदेव – के विरुद्ध जातीय अपमान, सामाजिक बहिष्कार और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायती पत्र सौंपा।

धार्मिक आयोजन में सहभागिता, लेकिन अंत में मिला अपमान

बताया गया कि सावन माह के दौरान गांव के अखाड़ा मंदिर में पार्थिव शिवलिंग पूजन और पार्थिव पूजन का आयोजन किया गया था। आयोजन के समापन पर सामूहिक कन्या भोज और भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें चंदेल बुनकर समाज के छत्रपाल चंदेल पुत्र तुलसी, मुकेश पुत्र दयाराम, और समाज के कई अन्य लोग शामिल थे।

कुछ लोग भोजन परोस रहे थे, कुछ बच्चे भोजन कर रहे थे। लेकिन इसी दौरान, गांव के अन्य समाज से जुड़े कुछ लोगों ने उन्हें यह कहते हुए भगा दिया –

“तुम लोग अछूत और नीची जाति के हो, मंदिर के भंडारे में हमारे साथ नहीं बैठ सकते।”

“हमने चंदा दिया, हिसाब रखा… फिर भी हमें अछूत समझा गया” – मुलु चंदेल

मुलु उर्फ मुलवा चंदेल ने बताया कि-

मुलु चंदेल, सोंरई

“हमने पूरे आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। चंदा इकट्ठा करने से लेकर हिसाब-किताब, देखरेख तक की जिम्मेदारी निभाई। लेकिन जब खाने की बारी आई, तो हमारे साथ अछूतों जैसा व्यवहार किया गया। सरकार ने हमें सामान्य वर्ग में रख दिया, लेकिन गांव में मानसिकता आज भी पिछड़ी हुई है।”

“हम खाना खा रहे थे, लेकिन भगा दिया गया” – राहुल चंदेल, सोंरई

राहुल चंदेल ने बताया कि वे अन्य लोगों के साथ भोजन कर रहे थे, कुछ लोग परोसने का काम कर रहे थे, लेकिन तभी तीन लोग आए और बीच कार्यक्रम से उन्हें भगाने लगे।

“हम अपमानित महसूस कर रहे थे, लेकिन संयम बरता क्योंकि माहौल बिगड़ सकता था। अब हम कानूनी कार्यवाही चाहते हैं।”

“हम पढ़े-लिखे हैं, एकता में रहते हैं… लेकिन जातिवादी सोच से जूझ रहे हैं” – रवि चंदेल, मड़ावरा

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रवि चंदेल ने कहा कि-

“हम एक शिक्षित समाज हैं, सबके साथ मिलकर रहते हैं। लेकिन आज भी कुछ जातीय कुंठा से ग्रस्त लोग हमें अपमानित करते हैं। ये न केवल हमारे आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है, बल्कि सामाजिक तानेबाने को भी कमजोर करता है।”

सरकार ने सामान्य वर्ग में किया शामिल, लेकिन समाज की सोच अभी भी जंजीरों में

गौरतलब है कि बुनकर समाज, जिसे पहले अनुसूचित जाति (SC) में रखा गया था, अब उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सामान्य वर्ग में सूचीबद्ध कर दिया गया है। इसके बावजूद, समाज में भेदभाव और जातीय दुर्भावना का यह स्तर चिंता का विषय है।

थाने में शिकायती पत्र, एफआईआर की मांग

चंदेल समाज के जिन प्रमुख लोगों ने थाने में शिकायत की, उनमें शामिल हैं:
अखिलेश, बालचंद, सुरेन्द्र, मुलु, दीपक, रोशन, बलराम, तुलसी, नंदराम, प्रेम, रामकिशोर, खुशी, मुकेश, दयाराम, चंदन, मनीष, मोनू, मुरलीधर, छत्रपाल चंदेल आदि।

इन सभी ने मड़ावरा पुलिस से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कर सख्त कार्यवाही की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार के सामाजिक द्वेष और अपमान की पुनरावृत्ति न हो।

क्या कहता है कानून?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता को अपराध मानता है।

SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 (हालांकि बुनकर समाज अब सामान्य वर्ग में है, पर यदि जातिसूचक अपमान और सामाजिक बहिष्कार होता है, तो IPC की धारा 153A, 504, 505 और 506 के तहत कार्रवाई संभव है)।

मानव गरिमा के उल्लंघन पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत की जा सकती है।

प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल

अब तक पुलिस ने केवल शिकायती पत्र लिया है, एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। इससे प्रशासन की निष्क्रियता और जातीय मामलों में ढीले रवैये पर सवाल उठने लगे हैं।

समाप्ति पर एक सवाल – कब खत्म होगी ये जातिवादी सोच?

आज के समय में जब देश चंद्रयान भेज रहा है, डिजिटल इंडिया की बातें हो रही हैं, तब भी गांवों में जाति के नाम पर सामाजिक अपमान और बहिष्कार हो रहा है। यह घटना न सिर्फ संविधान और लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक बड़ा खतरा है।

📌 समाचार तक मांग करता है कि इस घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों को कानून के तहत सजा मिले और सामाजिक समरसता बनाए रखने हेतु प्रशासन सजग भूमिका निभाए।

📎 ब्यूरो रिपोर्ट – आर. के. पटेल | समाचार तक | मड़ावरा, ललितपुर, samachartak.co.in

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