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लोक अदालत जन हितैषी : जिला जज

आपसी सुलह समझौते से परिवार संरक्षित : कुटुंब न्यायधीश

 

ललितपुर

जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण आलोक कुमार पाराशर की अध्यक्षता में लोक अदालत को कैसे सफल बनाए विषय पर प्रेस वार्ता संपन्न हुई। जिला जज ने बताया कि लोक अदालत का मतलब है लोगों की अदालत। यह एक ऐसा मंच है जहां न्यायालय में लंबित या मुकदमेबाजी से पहले के चरणों में मामलों का सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटारा किया जाता है। हाल के दिनों में, इसे वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) के साधन के रूप में काफी लोकप्रियता मिली है। कोई भी व्यक्ति अपने विवाद को मध्यस्थता और सुलह के माध्यम से निपटाने के लिए लोक अदालत में भेज सकता है। लोक अदालतों का गठन भारतीय संविधान की प्रस्तावना द्वारा दिए गए वादे को पूरा करने के लिए किया जाता है, जिसके अनुसार- भारत के प्रत्येक नागरिक के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय को सुरक्षित करना कहा गया है। संविधान का अनुच्छेद 39 समाज के वंचित और कमजोर वर्गों को निशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करने की वकालत करता है और समान अवसर के आधार पर न्याय को बढ़ावा देता है। संविधान के अनुच्छेद 14 और 22(1) भी राज्य के लिए कानून के समक्ष समानता की गारंटी देना अनिवार्य बनाते हैं। कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश नंदप्रताप ओझा ने बताया कि हमारा उद्देश्य आपसी सुलह समझौते से परिवारों को टूटने से बचाना है, पति पत्नी को आपसी सुलह समझौते से वैवाहिक जीवन की पुर्नस्थापना से टूटते परिवारों को बचाने का एक माध्यम लोक अदालत है। इस बार जिन परिवारों को पुर्नस्थापित किया जाऐगा, उन्हें एक पौधा उपहार स्वरूप दिया जायेगा जिससे उनका दांपत्य जीवन पल्लवित पुष्पित हो सकें। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव यशवंत कुमार सरोज ने प्रेस वार्ता का संचालन करते हुए बताया कि लोक अदालत अपने स्वयं के अनुरोध पर संदर्भित मामले का निर्णय नहीं करेगी, बल्कि पक्षों के बीच समझौते या समाधान के आधार पर उसका निर्णय किया जाएगा। सदस्य स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से पक्षों को उनके विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान तक पहुंचने के उनके प्रयास में सहायता करेंगे। राष्ट्रीय लोक अदालत 14 सितम्बर 2024 को मामलों के निष्पादन के लिए प्रत्येक न्यायालय में एक पीठ बनेगी जिसमें सहयोग के लिए न्यायाधीश के साथ पीठ के सदस्य के रुप में एक पैनल अधिवक्ता को नियुक्त किया जाएगा।

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फोटो–पत्रकारों को संबोधित करते जिला जज।

रिपोर्ट –रामकुमार पटेल।

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