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प्रशासन के कानों तक नहीं पहुंच रही तेज प्रेसर हॉर्नो की आवाजें, लोग परेशान, अत्याधिक तेज हॉर्न बजने के कारण बना रहता है हृदय रोग जैसी जानलेवा विमारियों का खतरा,

मोटर मालिको द्वारा सरकार के मानकों को ताक पर रख कर लगवाए गए प्रेसर हॉर्न बने लोगो के लिए मुसीबत की जड़, परेशान होकर ग्रामीण ने उपजिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

मड़ावरा / ललितपुर

जनपद के तहसील मुख्यालय में सड़को पर चल रहे छोटे बड़े वाहन परिवहन विभाग के मानको को ताक पर रख कर तेज हॉर्न बजाकर लोगों के स्वास्थ के साथ कर रहे खिलवाड़।
जिला मुख्यालय पर बैठे परिवहन बिभाग के सक्षम अधिकारी द्वारा ये वाहन मालिकों पर नकेल न कसे जाने के कारण आम जन के लिए ध्वनि प्रदूषण का खतरा बढ़ रहा है,
तो परिवहन विभाग द्वारा निर्धारित  और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। तेज हार्न के कारण लोगों के कान पर असर पड़ता है और उनके बहरा होने का खतरा बढ़ जाता है। तेज हॉर्न लगाकर दूसरे वाहन चालकों के लिए भी मुसीबत बने हुए हैं। इनके कारण हादसे भी बढ़ रहें हैं। लेकिन परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन को इससे कोई मतलब नहीं है। तेज हॉर्न को आवाज इनके कानों तक नही पहुंच रही है। जिससे इन पर रोक नही लग रही है जिससे ओवरलोड से लेकर छोटे वाहन चालक तेज हॉर्न का उपयोग कर रहे है।
आपको बता दे कि मड़ावरा / पिसनारी निवासी लक्ष्मण सिंह पुत्र भरत सिंह ने मड़ावरा में उपजाधिकारी को बीते शनिवार के दिन ज्ञापन दिया जिसमें बताया कि सभी बसों में मानक से भी ज्यादा तीव्र गति से बजने वाले प्रेसर हॉर्न लगार बहुत देर तक बजाते है औऱ अगर मन करो तो मारपीट पर आमादा हो जाते ।
चुकी प्रार्थी का मकान बाजार अस्थायी बस स्टैण्ड के पास है जिससे तीव्र आबाज से बजने पर उनके चाचा जो कि ह्रदय रोग से पीड़ित है जिससे उन्हें जानलेवा समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
जब हमने उन बसों को तेज हॉर्न बजाने को रोका तो बस स्टाफ लड़ाई झगड़े को तैयार हो गए और कहने लगे की हमारा कोई कुछ नहीं कर सकता क्योंकि हम सभी जगह पैसे देते है। ज्यादा करोगे तो हम बस चढ़ा देंगे क्योंकि हमारे बस चालकों के हेवी लाइसेंस है हम किसी से नहीं डरते है।शिकायतकर्ता ने उपजिलाधिकारी से गुहार लगाते हुए तेज हॉर्न को बंद कराकर धीमी आवाज के हॉर्न बसों में लगाने की बात कही जिससे मरीजों को कोई समस्या उत्पन्न न हो।

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तेज हॉर्न से स्कूली बच्चों को पड़ता है प्रभाव

चिकित्सक बताते हैं कि तेज आवाज सिर्फ कान के पर्दे को ही प्रभावित नहीं करते, इससे मानसिक संतुलन भी बिगड़ता है। लगातार तेज आवाज में रहने के कारण सबसे खराब प्रभाव स्कूली बच्चों को पड़ता है। लगातार तेज आवाज में रहने के कारण धीरे-धीरे सुनने की क्षमता कम हो जाती है। मगर एहसास नहीं होने के कारण पता नहीं चलता है। क्लास में शिक्षक द्वारा पढ़ाए जाने वाले पाठ को भी सही प्रकार से समझ नहीं पाते हैं और क्लास में पिछडऩे लगते हैं।

तेज और प्रेसर हॉर्न लोगों के लिए सिर का दर्द बना हुआ है।
मड़ावरा तहसील क्षेत्र का सबसे ज्यादा ज्यादा जंहा के लोग मड़ावरा स्वास्थ सेवायें और तहसील और राजस्व संबंधी कार्य को लेकर आते है जिनको मानक से कई गुना तेज औऱ खतरनाक ध्वनि प्रदूषण का सामना करना पड़ता है जो प्रेसर हॉर्न औऱ लोडर पिकअपो में लगे माइक साउंड से होने बाली समस्याओउत्पन्न सड़क किनारे बैठे दुकानदार मेहनत मजदूरी करने बाले पैदल व साइकिल से सफर कर रहे आम जन और गरीब लोगों को होती है,
प्रतिदिन अत्याधिक तेज हॉर्न से प्रभावित होते है जिसके बजने से आमजन में चिड़चिड़ापन महसूस करते। ऐसे में लोगो का सवाल है कि इन तेज हॉर्न पर रोक कौन लगाएगा क्योंकि कस्बा मड़ावरा में परिवहन विभाग की कोई सक्रियता नहीं दिखती न ही पुलिस प्रशासन उनके प्रति सक्रिय होता है ।
जिससे इनको रोकने वाला कोई नहीं है।जिससे सभी वाहन चालक अपनी मनमर्जी के अनुसार तेज हॉर्न का प्रयोग करते है।

रिपोर्ट- आर के पटेल
मड़ावरा / ललितपुर
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