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50 साल से आबादी वाली ज़मीन पर झूठे दावे, मडावरा में शिवलाल परिवार पर ग्रामीणों का संगीन आरोप – पट्टा निरस्तीकरण की मांग तेज,

"पट्टा तो मिला शिवलाल को, मगर गांव बसा जनता की मेहनत से – अब वारिस बेच रहे अवैध रजिस्ट्री, ग्रामीण भड़के"

मड़ावरा (ललितपुर)

ललितपुर जनपद के मड़ावरा ब्लॉक मुख्यालय में ज़मीन विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। ग्रामीणों ने खुलकर आरोप लगाया है कि शिवलाल तनय कलू को वर्ष 1970 में आवंटित आराजी संख्या 723 (वर्तमान संख्या 1573ज, रकबा 3 एकड़) का पट्टा अब बेमानी हो चुका है, क्योंकि इस पर आधी सदी से अधिक समय से पूरा गांव बसा हुआ है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई है कि शिवलाल का पट्टा तत्काल निरस्त किया जाए, ताकि झूठे मुकदमेबाजी और उत्पीड़न का सिलसिला थमे।

“मडावरा के ग्रामीणों ने 50 साल पुराने विवादित पट्टे की निरस्तीकरण व अवैध बिक्री की जांच को लेकर जिलाधिकारी को सौंपा सामूहिक प्रार्थना पत्र।”

ग्रामीणों का बड़ा आरोप : “झूठी शिकायतें व हरिजन एक्ट में फंसाने की धमकी”

ग्रामवासियों ने सामूहिक शिकायत में कहा है कि पट्टा धारक के वारिस — मनोहरलाल पुत्र गुंठे, अशोक व कन्हैयालाल पुत्रगण बच्चूलाल, रघुबीर पुत्र गुंठे, लक्ष्मण उर्फ पंचूलाल, गनेशबाई पत्नी गुंठे, हजारीलाल पुत्र बच्चूलाल — पिछले एक वर्ष से पूरे गांव को परेशान कर रहे हैं।
इन पर आरोप है कि ये लोग प्रशासनिक अधिकारियों को गुमराह कर झूठे शिकायती पत्र देते हैं, सरकारी निर्माण कार्य जैसे सीसी रोड और नाली रुकवाने की कोशिश करते हैं और ग्रामीणों को हरिजन एक्ट में फंसाने की धमकी देकर दबाव बनाते हैं।

आबादी और सरकारी योजनाओं से जुड़ी है भूमि-

ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि पर आज शिवलाल का पट्टा बताया जा रहा है, वह वास्तव में वर्षों से आबादी की ज़मीन है। यहां पर सैकड़ों परिवार मकान बनाकर रहते हैं और शासन की कई योजनाओं का लाभ भी इसी ज़मीन पर मिला है।

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आरोप है कि शिवलाल के वारिसगण — मनोहरलाल पंत सहित अन्य — न केवल झूठे शिकायती पत्र देकर ग्रामीणों को परेशान करते हैं, बल्कि मनोहरलाल ने तो इसी नंबर की जमीन का कुछ हिस्सा नियमविरुद्ध रजिस्ट्री कर बेच भी दिया है। ग्रामीणों ने इसे गंभीर अपराध बताते हुए जांच की मांग की है।
इसी भूखंड पर शासकीय विद्यालय, बीआरसी कार्यालय, दूरसंचार कार्यालय, सीसी रोड, शौचालय, सरकारी आवास, विद्युतीकरण, बिजली घर जैसी सार्वजनिक सुविधाएं स्थापित हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि जब जमीन पर सरकारी दफ्तर और योजनाएं चल रही हैं, तो व्यक्तिगत पट्टे का अस्तित्व ही कहाँ बचता है?

कई बार हुई जांच, फिर भी विवाद जारी,

ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रकरण में उच्चाधिकारियों द्वारा कई बार मौके पर जांच की गई और रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि भूमि पर तोरिया व आबादी दर्ज है। बावजूद इसके शिवलाल के वारिस लगातार झूठी शिकायतें कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं।

“ज्ञापन सौंपने के बाद ललितपुर जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर न्याय की गुहार लगाते मडावरा के ग्रामीण।”

ग्रामीणों की सामूहिक आवाज-

गांव के 32 ग्रामीणों — जिनमें जयराम, राजू, इसरार, वहीद खां, राजाराम, नाथूराम, इशाकशाह, इस्माइल, अरविन्द्र, पुरुषोत्तम, जुनैद खां, हीरालाल, रामचरन, लक्ष्मण सिंह गौर, छोटेलाल, अम्बिका प्रसाद, दिनेश प्रकाश एडवोकेट, रघुनाथ, हरिश्चंद्र, आजाद, बाबा, मुलायम, इन्द्रेश, बलू, पंचमलाल, रज्जाक, अंसार, श्रीमती किरण सहित अन्य शामिल हैं — ने सामूहिक हस्ताक्षर कर डीएम से पट्टा निरस्तीकरण की मांग की है।

प्रशासन की भूमिका अहम-

ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते पट्टा निरस्त नहीं किया गया तो गांव में शांति भंग हो सकती है। अब पूरा मामला जिलाधिकारी की कोर्ट में है, और सभी की निगाहें प्रशासनिक फैसले पर टिकी हैं।

रिपोर्ट – लक्ष्मण गौर गौर, मड़ावरा (ललितपुर)
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