WEBSTORY
आयोजनउत्तर प्रदेशताज़ा ख़बरप्रसासनब्रेकिंग न्यूज़सिंचाई

भूमि व जल संरक्षण में सभी की भागीदारी बहुत जरूरी: डॉ. हीरा लाल

डॉ. हीरा लाल के नेतृत्व में हुई करीब 75 संस्थाओं की बैठक में एमओयू पर चर्चा , किसानों व ग्रामीणों के उत्थान में स्वयंसेवी संस्थाओं और स्टार्ट अप की परियोजना में ली जाएगी मदद,

लखनऊ,

भूमि और जल संरक्षण के साथ ही किसानों व ग्रामीणों के उत्थान की दिशा में एक अनूठी पहल की गयी है। इसके तहत प्रदेश की स्वयंसेवी संस्थाओं और  स्टार्ट अप की भी मदद ली जाएगी। इसके तहत संस्थाओं के ज्ञान के आदान-प्रदान और बहुमूल्य सुझावों को तरजीह देते हुए आपसी सहयोग से गाँव का पानी गाँव में और खेत का पानी खेत में रोकने और किसानों व ग्रामीणों के जीवन स्तर में बदलाव लाने की दिशा में विशेष योजना तैयार की जा रही है। परियोजना के तहत ग्रामीणों को अनुदान प्रदान कर उनके जीवन स्तर में सुधार लाया जा रहा है।
इसी पर विचार-विमर्श और कार्य योजना तैयार करने को लेकर मंगलवार को गोमतीनगर स्थित भू-मित्र भवन में राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी, वाटरशेड विकास घटक-प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. हीरा लाल की अध्यक्षता में प्रदेश के 75  स्वयंसेवी संस्थाओं और स्टार्ट अप की बैठक हुई। यह बैठक भारत सरकार की गाइडलाइन की धारा 06 में उल्लिखित इंटीग्रेशन व कन्वर्जेन्स के अनुपालन में की गयी । बैठक में मुख्य अतिथि पद्मश्री राम सरन वर्मा ने कम लागत में अधिक उत्पादन के जरूरी टिप्स दिए।

डॉ. हीरा लाल ने जल-जंगल, जमीन और जीव-जन्तु को संरक्षित करने की दिशा में सरकार द्वारा उठाये जा रहे प्रमुख क़दमों के बारे में जानकारी दी और कहा कि सभी की सामूहिक भागीदारी से ही समृद्ध भारत की बुनियाद रखी जा सकती है। इसी के तहत देश के विभिन्न हिस्सों के साथ ही प्रदेश के 34 जिलों में वाटरशेड यात्रा निकालकर जन-जन को जल की महत्ता समझाई जा रही है। गांवों में तालाब बनाए जा रहें हैं, मिटटी के कटाव को रोकने के लिए मेडबंदी और वृक्षारोपण किया जा रहा है। खेत में मेडबंदी से भूमि की उर्वरा शक्ति में सुधार किया जा सकता है । मिट्टी में नमी का संरक्षण किया जा सकता है और भू-जल स्तर में वृद्धि की जा सकती है। सिंचाई की उन्नत विधियों को लोगों के बीच प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भूमि व जल संरक्षण से जहाँ हर खेत में हरियाली आएगी वहीँ इससे हर घर में खुशहाली भी आएगी । इसी सोच के साथ 34 जिलों में 52 परियोजनायें संचालित की जा रही    हैं ।

20260817-152325
20260817-152100
20260817-150957
20260817-145919
20260817-150655
20260817-144912
20260817-150247
20260817-145243
20260817-145547
20260817-144111
20260817-144650
20260817-144342
20260817-142629
20260817-143218
20260817-143842
20260817-121458
20260817-141549
20260817-141242
20260817-142848
20260817-115207
20260817-140453
20260817-140141
20260817-121037
20260817-122738
20260817-110430
20260817-141802
20260817-140843
20260817-120546
20260817-104010
20260817-105540
20260817-121852
20260817-111554
20260816-172557
20260817-105043
20260817-105328
20260817-104652
20260817-120141
20260823-124318

फसल चक्र अपनाएं, उत्पादन बढ़ाएं : पद्मश्री राम सरन वर्मा ने कहा कि भूमि को स्वस्थ रखने में फसल चक्र बहुत उपयोगी है। उन्होंने कहा कि गेहूं और धान के फसल के उपज के साथ ही सब्जी और फल की खेती से कम लागत में अधिक उत्पादन किया जा सकता है । फसल चक्र अपनाने से बीमारियों में भी कमी लायी जा सकती है । उन्होंने बताया कि इस समय वह एक बड़े भू-भाग में खेती के साथ ही बड़ी संख्या में लोगों रोजगार देने में सफल हुए हैं

विभागीय अधिकारियों और हर एक जिले से आईं एनजीओ और स्वमसेवी संस्थाओं के साथ योजना के कार्यान्वित संबंधी बिचार विमर्श करते, डॉ हीरा लाल

बैठक में विषय वस्तु विशेषज्ञ कृषि विभाग आर.एस.वर्मा, प्राविधिक अधिकारी कृषि विभाग शैलेश कुमार वर्मा, परियोजना के तकनीकी समन्वयक डॉ. जे. एम. त्रिपाठी समेत अन्य विभागीय अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक में अर्श फाउंडेशन, विज्ञान फाउंडेशन,  सेव सोसायटी, चाइल्ड हेल्प फाउंडेशन, सांगी महिला संगठन, न्यूट्रीशन इंटरनेशनल, पेस, नारायण ग्रामोद्योग सेवा संस्थान, सम्भव सेवा संस्थान, सृष्टि सेवा संस्थान, साई संस्था, कावेरी फाउंडेशन आदि ने हिस्सा लिया।

रिपोर्ट- आर के पटेल
समाचार तक

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!
google.com, pub-9022178271654900, DIRECT, f08c47fec0942fa0