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प्रसासन

गोवा राज्य के राज्यपाल ने कुशल प्रशासक के रूप में डॉ. हीरा लाल को किया सम्मानित

राज्यपाल ने “इम्पैक्ट बियांड मेजर सीएसआर अवार्ड” से नवाजा

लखनऊ

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सामाजिक कल्याण निदेशालय के तत्वावधान में मंगलवार को राजभवन गोवा में आयोजित सम्मान समारोह में उत्तर प्रदेश के आईएएस अधिकारी डॉ. हीरा लाल को सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि गोवा के राज्यपाल पी. एस. श्रीधरन पिल्लई और विशिष्ट अतिथि गोवा के सामाजिक कल्याण मंत्री सुभाष फल देसाई ने डॉ हीरालाल को “इम्पैक्ट बियांड मेजर सीएसआर अवार्ड” से नवाजा।
डॉ. हीरा लाल को यह सम्मान कुशल प्रशासक के रूप में उनके द्वारा सार्वजानिक क्षेत्र में किये गए नवाचारों, विचारों, कार्यान्वयन और समर्पण से विभिन्न क्षेत्रों में आये बदलावों को देखते हुए प्रदान किया गया है। समाज के प्रति उनके अतुलनीय योगदान को भी सराहा गया है, जो विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में भी सहायक साबित होगा। इसके साथ ही सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रगति की दिशा में उनके द्वारा किये गए सराहनीय कार्यों को भी देखते हुए उन्हें इस सम्मान के लिए चुना गया है। ज्ञात हो कि डॉ. हीरा लाल ने बांदा जिलाधिकारी के रूप में वहां की सबसे बड़ी पानी की समस्या को विभिन्न नवाचारों के माध्यम से दूर किया था और जिले के मतदान प्रतिशत को भी बढ़ाने के लिए कई नवाचार किये, जो बेहद सफल रहे। इसी तरह ग्रीन इलेक्शन, मॉडल गाँव और प्लास्टिक मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में भी उनके द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही पर्यावरण को बचाने के लिए डॉ. हीरा लाल “दो मां” की विचारधारा को लोगों के बीच लेकर जा रहे हैं, पहली मां जो हमें जन्म देती है और दूसरी मां जो हमें पालती-पोषती है यानि धरती मां जो कि जल-जंगल और जमीन से बनी है। इसको लेकर उनके द्वारा व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है, जिसका धरातल पर बड़े पैमाने पर असर भी देखने को मिल रहा है, लोग जल-जंगल-जमीन और जीव को बचाने के लिए आगे भी आ रहे हैं। इसके अलावा वह लोगों की मदद के लिए “रेड टेप” नहीं बल्कि “रेड कारपेट” में विश्वास रखते हैं, जिससे लोग उनसे जुड़कर कार्य करने में सहज महसूस करते हैं। इसीलिए वह जो भी अभियान शुरू करते हैं वह जल्द ही एक कारवाँ का रूप अख्तियार कर लेता है। इस तरह डॉ. हीरा लाल के सुशासन के मन्त्र में केवल नियम-कानून ही नहीं बल्कि रिलेशनशिप भी है। वह सुशासन के माध्यम से लोगों के बीच एक ऐसे माहौल का निर्माण करते हैं, जो कि सुशासन के लिए बहुत ही जरूरी है। इसके लिए उन्हें सरकारी और गैर सरकारी संगठनों द्वारा समय-समय पर सम्मानित भी किया गया है।

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