
कटिहार
कटिहार गैस कीमत प्रभाव अब छोटे कारोबारियों पर साफ दिखाई देने लगा है। रसोई गैस के लगातार बढ़ते दामों ने होटलों और ढाबा संचालकों को फिर से पुराने तरीके अपनाने पर मजबूर कर दिया है।
जिन ढाबों में पहले गैस सिलेंडरों की भरमार रहती थी, वहां अब लकड़ी और मिट्टी के चूल्हे जलते नजर आ रहे हैं। बढ़ती लागत के कारण संचालक गैस का उपयोग सीमित कर चुके हैं।
स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि गैस सस्ती होने पर काम आसान और तेज होता था, लेकिन अब खर्च बढ़ने से कामकाज प्रभावित हो गया है। इससे व्यापार की गति भी धीमी पड़ गई है।
चूल्हे के उपयोग से समय अधिक लग रहा है और धुएं के कारण काम करने वालों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इसके बावजूद मजबूरी में यही तरीका अपनाना पड़ रहा है।
संचालकों के अनुसार बढ़ती लागत का असर खाने की कीमतों पर भी पड़ा है, जिससे ग्राहकों की संख्या में कमी आई है। छोटे होटल और ढाबे अब अपने व्यापार को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
रिपोर्ट – प्रीतम चक्रवर्ती
पूर्णिया प्रमंडल प्रभारी
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