
कानपुर नगर
महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, गदनपुर आहर, बेल्लौर, कानपुर नगर में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रीय एकीकृत शिक्षा परिषद के सचिव आईएएस डॉ. हीरा लाल ने उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े जैविक खेती फार्म का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्राकृतिक खेती को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए किसानों से रसायन मुक्त खेती अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान जैविक पौधरोपण भी किया गया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
आईएएस डॉ. हीरा लाल ने कहा कि आज के समय में कृषि को टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मिट्टी, स्वच्छ पर्यावरण और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पादन के लिए किसानों को आधुनिक तकनीक के साथ प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा। उनका कहना था कि जैविक खेती केवल उत्पादन बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव भी है।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव और आईएएस डॉ. हीरा लाल ने संयुक्त रूप से पौधरोपण कर किया। दोनों अतिथियों ने पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संदेश दिया।
H2 आईएएस डॉ. हीरा लाल बोले, जैविक खेती बनेगी आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला
आईएएस डॉ. हीरा लाल ने अपने संबोधन में कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग और जैविक खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा का भी प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और कृषि संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे किसानों तक नई तकनीक और व्यवहारिक प्रशिक्षण पहुंचाएं।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा जैविक खेती फार्म किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और शोधार्थियों के लिए एक उत्कृष्ट प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र बनेगा। यहां आधुनिक जैविक तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा तथा किसानों को व्यवहारिक प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा।
H2 किसानों और शोधार्थियों के लिए बनेगा आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र
कार्यक्रम का संचालन फॉर्मरफेस ऑर्गेनिक टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुख्य प्रबंध निदेशक मोहन मुरारी सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि जैविक खेती को जनआंदोलन बनाने के लिए किसानों, वैज्ञानिकों और शिक्षण संस्थानों को मिलकर कार्य करना होगा।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, शोधार्थी, प्रगतिशील किसान तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने अधिक से अधिक पौधरोपण करने और जैविक खेती को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
रिपोर्ट – आर. के. पटेल (लखनऊ)
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