Uttar Pradesh; नए रेंजर की सख्ती से कांपे वन माफिया, प्रतिबंधित खैर की लकड़ी से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली जब्त
मड़ावरा खैर की लकड़ी जब्ती: 15 हरे पेड़ पकड़े, नए रेंजर की बड़ी कार्रवाई

ललितपुर।
एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार करोड़ों पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण और हरित उत्तर प्रदेश का सपना साकार करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर जंगलों के दुश्मन वन माफिया बहुमूल्य और प्रतिबंधित वृक्षों की अवैध कटान कर सरकार की मंशा पर सीधी चोट पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। जनपद ललितपुर की मड़ावरा वन रेंज में वन विभाग ने ऐसी ही एक बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित खैर की लकड़ी से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली को पकड़ लिया। ट्रॉली में करीब 15 ताजा कटे हरे खैर के बोटे लदे मिले। कार्रवाई के दौरान ट्रैक्टर चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया।
मुखबिर की सूचना पर हुई घेराबंदी
वन विभाग को सूचना मिली थी कि सौंराई और जलंधर बीट के बीच से प्रतिबंधित खैर की लकड़ी की तस्करी की जा रही है। सूचना मिलते ही क्षेत्रीय वन अधिकारी मोहम्मद नदीम के नेतृत्व में टीम ने तत्काल घेराबंदी की। वन विभाग की टीम ने ट्रैक्टर ट्रॉली को रोक लिया। मौके पर ट्रॉली में ताजा कटे हुए खैर के बोटे बरामद हुए।
वन विभाग के अनुसार यह लकड़ी प्रथम दृष्टया अवैध कटान की प्रतीत होती है। लकड़ी और ट्रैक्टर ट्रॉली को जब्त कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
ट्रैक्टर छोड़कर भागे आरोपी
वन विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि कार्रवाई के दौरान शिव प्रताप एवं लोकेंद्र सिंह नाम के व्यक्ति ट्रैक्टर छोड़कर भागते दिखाई दिए। विभाग ने दोनों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। मामले में वन अधिनियम के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
वन कर्मी को मारने की धमकी का आरोप
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई के बाद एक व्यक्ति पर एक वन कर्मी को धमकी देने का भी आरोप है। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो वन अपराध के साथ-साथ संबंधित आपराधिक धाराओं में भी कार्रवाई की जाएगी।
नए वन क्षेत्राधिकारी की सख्ती से बदली तस्वीर
मड़ावरा वन रेंज में हाल ही में कार्यभार संभालने वाले क्षेत्रीय वन अधिकारी मोहम्मद नदीम की लगातार सख्त कार्रवाई से वन माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से इस क्षेत्र में खैर, सागौन और अन्य बहुमूल्य वृक्षों की अवैध कटान की शिकायतें मिलती रही हैं। जंगलों में कटे हुए पेड़ों के ठूंठ आज भी इस बात की गवाही देते हैं कि लंबे समय तक वन संपदा का दोहन होता रहा।
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि नए वन क्षेत्राधिकारी के आने के बाद पहली बार लगातार प्रभावी कार्रवाई देखने को मिल रही है। जंगल से प्रेम करने वाले लोग इस अभियान की खुलकर सराहना कर रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि यदि इसी प्रकार कार्रवाई जारी रही तो वन माफियाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
एक महीने में लगातार बड़ी कार्रवाई
वन विभाग की कार्रवाई केवल एक मामले तक सीमित नहीं रही है। कुछ दिन पहले भी विभाग ने खैर की लकड़ी से जुड़े एक मामले में लगभग 1.75 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया था। अब प्रतिबंधित खैर की लकड़ी से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली जब्त कर विभाग ने यह संदेश दिया है कि अवैध कटान और तस्करी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार वन विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है और सूचना तंत्र को भी सक्रिय किया गया है ताकि जंगलों में अवैध कटान करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो सके।
जंगल बचेंगे तभी सुरक्षित रहेगा भविष्य
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि खैर जैसे बहुमूल्य वृक्ष केवल आर्थिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लगातार हो रही अवैध कटान जंगलों के अस्तित्व के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए भी खतरा बन सकती है।
जनता ने की कार्रवाई जारी रखने की मांग
क्षेत्रीय लोगों ने वन विभाग की कार्रवाई की सराहना करते हुए मांग की है कि अवैध कटान और लकड़ी तस्करी में शामिल पूरे नेटवर्क की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही जंगलों में नियमित गश्त बढ़ाई जाए, ताकि कोई भी वन माफिया दोबारा सरकारी संपत्ति और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का साहस न कर सके।
संपादकीय टिप्पणी: इस समाचार में जिन व्यक्तियों के संबंध में आरोपों का उल्लेख है, वे वन विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई प्रारंभिक जानकारी और कार्रवाई पर आधारित हैं। संबंधित व्यक्तियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
रिपोर्ट – आर. के. पटेल (ललितपुर)
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