Uttar Pradesh; SDM की सख्ती से बदले स्कूलों के हाल
तीसरे दिन भी मड़ावरा के स्कूलों में औचक निरीक्षण, बच्चों को खुद पढ़ाया गणित, लापरवाही पर वेतन रोका और शिक्षकों को फटकार

ललितपुर
मड़ावरा विद्यालय निरीक्षण अभियान से शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है। ललितपुर जिले की मड़ावरा तहसील में उपजिलाधिकारी मदन मोहन गुप्ता लगातार तीसरे दिन भी सरकारी विद्यालयों के औचक निरीक्षण पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने केवल विद्यालयों की व्यवस्थाओं का निरीक्षण ही नहीं किया, बल्कि छात्र-छात्राओं की शैक्षिक गुणवत्ता भी परखी और सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की।
मड़ावरा ब्लॉक के गिदवाहा और भीकमपुर स्थित विद्यालयों में निरीक्षण के दौरान कई कमियां सामने आईं। जानकारी के अनुसार कुछ शिक्षक समय से विद्यालय नहीं पहुंचे थे, जबकि कुछ स्थानों पर शिक्षण व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिली। इस पर उपजिलाधिकारी ने संबंधित शिक्षकों को कड़ी फटकार लगाई और एक शिक्षक की कार्य में लापरवाही पाए जाने पर एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए।
शिक्षक की भूमिका में भी नजर आए एसडीएम
निरीक्षण के दौरान उपजिलाधिकारी मदन मोहन गुप्ता ने बच्चों से सीधे संवाद किया और उनकी पढ़ाई का स्तर जांचा। विद्यालय में मौजूद लोगों के अनुसार उन्होंने ब्लैकबोर्ड पर स्वयं गणित के सवाल लिखकर विद्यार्थियों को सरल और सहज तरीके से समझाया। बच्चों ने भी उत्साह के साथ सवालों के उत्तर दिए और पढ़ाई में रुचि दिखाई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी प्रशासनिक अधिकारी को विद्यालय में एक शिक्षक की तरह बच्चों को पढ़ाते देखना प्रेरणादायक रहा। उनका मानना है कि इससे विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ा और शिक्षकों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का स्पष्ट संदेश मिला।
शिक्षा की गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं
निरीक्षण के दौरान उपजिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे भी बेहतर शिक्षा पाने के हकदार हैं। उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिए कि समय से विद्यालय पहुंचें, नियमित रूप से कक्षाएं संचालित करें और प्रत्येक विद्यार्थी की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि शिक्षा के स्तर में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
प्रधानाध्यापक भी नहीं दे सके संतोषजनक जवाब
सूत्रों के अनुसार निरीक्षण के दौरान कुछ प्रधानाध्यापक उपजिलाधिकारी द्वारा पूछे गए सवालों का संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई और चेतावनी दी कि यदि भविष्य में शिक्षण कार्य या विद्यालय संचालन में शिथिलता मिली तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
वर्षों बाद दिख रही ऐसी सख्ती
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में सरकारी विद्यालयों का इस प्रकार लगातार निरीक्षण नहीं हुआ। उनका मानना है कि नियमित निगरानी से शिक्षा व्यवस्था में सुधार आएगा और विद्यालयों में अनुशासन भी बढ़ेगा।
लोगों का कहना है कि लंबे समय से कुछ विद्यालयों में समयपालन और शिक्षण व्यवस्था को लेकर शिकायतें मिलती रही हैं। अब प्रशासन की सक्रियता से अभिभावकों में उम्मीद जगी है कि सरकारी विद्यालयों की स्थिति में सकारात्मक बदलाव आएगा।
ग्रामीणों ने उठाई व्यापक जांच की मांग
कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खंड शिक्षा अधिकारी लंबे समय से अपने कार्यस्थल पर नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते और इस संबंध में पहले भी शिकायतें की जा चुकी हैं। कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि कुछ शिक्षक विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के बजाय अन्य कार्यों में अधिक व्यस्त रहते हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने मांग की है कि विद्यालयों के निरीक्षण के साथ-साथ खंड शिक्षा कार्यालय की कार्यप्रणाली, अधिकारियों की उपस्थिति, शिक्षकों की वास्तविक तैनाती, मिड-डे मील व्यवस्था, सरकारी अनुदान के उपयोग तथा छात्र नामांकन की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि शिकायतें गलत हैं तो जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, लेकिन यदि उनमें सच्चाई है तो गरीब बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
शिक्षा सुधार अभियान से बढ़ी उम्मीद
उपजिलाधिकारी मदन मोहन गुप्ता द्वारा लगातार किए जा रहे निरीक्षणों से क्षेत्र में शिक्षा सुधार की नई उम्मीद जगी है। अभिभावकों और ग्रामीणों का मानना है कि यदि यह अभियान इसी प्रकार जारी रहा तो वर्षों से चली आ रही लापरवाहियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा और सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शैक्षिक वातावरण मिल सकेगा।
संपादकीय टिप्पणी: खंड शिक्षा अधिकारी एवं कुछ शिक्षकों के संबंध में समाचार में उल्लिखित आरोप स्थानीय लोगों के कथनों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
रिपोर्ट – आर. के. पटेल (ललितपुर)
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