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तीन दिंसबर विश्व दिव्यागं दिवस के अवसर पर रफीक ने अपनी दिव्यांगता को दी चुनोती और कलम की ताखत से बनाई अपनी अलग ही पहचान

तीन दिंसबर विश्व दिव्यागं दिवस के अवसर पर रफीक ने अपनी दिव्यांगता को दी चुनोती और कलम की ताखत से बनाई अपनी अलग ही पहचान

पिपलोनकलां /आगर मालबा

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हिम्मत की कीमत है हौंसले से उड़ान मजबूरिया उन्हे क्या सतायेगी जिनके सपनों में है जान ऐसा ही कुछ कर दिखाया है पिपलोनकलां के पत्रकार रफीक खान ने जिन्होने कभी अपनी दिव्यांगता को मजबुरी नहीं माना और इसी दिव्यागंता को चुनोती देते हुए अपनी दिनचर्या चलाने में मजबुत हौंसला रख कलम को ताकत बनाकर आज इनके इस हौंसले को पत्रकार जगत को सलाम करता ही है साथ में अन्य दिव्यागों को भी मजबुती प्रदान करता है बचपन में रफीक को पोलियों निरोधक दवाई पिलाई थी परतुं वही जिन्दगी की दो बुंद दिव्यागंता का दाग दें गई जिसके बाद रफीक को कुछ पल के लिए अपनी जिन्दगीं लम्बी पारी खेलने के लिए हतोहत हो गए मगर उसके बाद हौंसले की एक चिंगारी ने मन में शोला भी जगा दिया इसी स्तिथि में कुछ कर गुजरना है ताकि मेरे जैसे और लोग भी इस हौंसले के साथ मजबुत होगें वही अपनी दिनचर्या चालू उसी समय तनोड़िया के वरिष्ट पत्रकार शिवकांत गोस्वामी जी से परिचय हुआ और उन्होने बोला कि आप हमारे अखबार बांटने का कार्य कर सकते है इस तिपहिया से तो तुरन्त हा कर ली और नगर में अखबार बांटने का कार्य की शुरूआत कर दी यही से शुरू हुआ पत्रकारिता करने का दौर नगर की छोटी मोटी समस्या पर अपनी लेखनी लिखना चालू कर दिया फिर क्या था कुछ ही महीनों के बित जाने के बाद रफीक ने एक दैनिक समाचार पत्र में कार्य करने का मन बना लिया और ऐसे धीरे धीरे अपनी लेखनी बड़ती गई और क्षैत्र में अपनी अलग ही पहचान बना ली पत्रकारिता के माध्यम से आज कई दैनिक समाचार पत्र व पोर्टल न्यूज चैंनल पर नगर के हर छोटी बड़ी खबर को प्रकाशित करते रहते है और समाज सेवा करने का जज्बा भी रखते है
*पत्रकारिता के क्षैत्र में एक अलग ही पहचान बनाई मुल्तानी ने* दिव्यागंता मे भी पत्रकारिता को ऐसा हथियार बनाया रफीक मुल्तानी ने व इसके माध्यम से पत्रकारिता में एक अलग ही पहचान बनाली अपनी कलम के दम पर जनहितेशी मुद्दों से लेकर भ्रष्टाचार की पोले भी प्रमुखता से प्रकाशित कर भ्रष्ट सिस्टम को सही आईना दिखा दिया आज दिव्यांग दिवस के उपलक्ष में ऐसे मजबुत दिव्यागों को शासन प्रशासन द्वारा शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास करना चाहिए साथ ही ऐसे मजबुत इरादें रखने वालों का हौंसला बड़ाना चाहिए और इनको सम्मान देना चाहिए ताकि ये हर परेशानी में कभी हतास ना हो रफीक ने चर्चा में बताया कि में दोनों पैरों से दिव्यागं हुं और मैने कभी अपने जीवन में कभी हार नही मानी अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए तनोड़िया मार्ग पर स्थित एक गुमटी डालकर फोटो कॉपी व टायपिगं करके जैसे तैसे अपने परिवार का पालन पोषण करता हुं और दुकान पर आने जाने के लिए प्राइवेट लोन लेकर एक बाइक खरीदी लेकिन मुझे शासन से इसके लिए किसी भी प्रकार की कोई सहायता राशी नही मिली है खुद के दम पर अत्मनिर्भर बना।

रिपोर्ट- रफ़ीक खान
आगर मालवा
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