Uttar Pradesh; LS एम्बुलेंस चालक पर झूठी सूचना देकर हार्ट अटैक मरीज को जोखिम में डालने का आरोप
सिमिरिया गांव के 70 वर्षीय विशाल सिंह को 40 मिनट तक नहीं मिली जीवनरक्षक एम्बुलेंस, चालक ने फोन पर गाड़ी पंचर बताई, अस्पताल परिसर में सही हालत में खड़ी मिली एम्बुलेंस, उच्चस्तरीय जांच और कठोर कार्रवाई की उठी मांग

ललितपुर
जनपद ललितपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मड़ावरा में जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। थाना मड़ावरा क्षेत्र के ग्राम सिमिरिया निवासी करीब 70 वर्षीय विशाल सिंह को हार्ट अटैक आने के बाद चिकित्सकों ने तत्काल जिला चिकित्सालय रेफर किया, लेकिन आरोप है कि गंभीर स्थिति के बावजूद उन्हें समय पर LS एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। परिजनों का कहना है कि करीब 40 मिनट तक इंतजार कराने के बाद चालक ने फोन पर गाड़ी पंचर होने की बात कही, जबकि बाद में वही एम्बुलेंस अस्पताल परिसर में पूरी तरह सही हालत में खड़ी मिली। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला एक गंभीर मरीज के जीवन को खतरे में डालने वाली लापरवाही माना जा सकता है।
ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे विशाल सिंह, हर मिनट था कीमती
परिजनों के अनुसार विशाल सिंह को हार्ट अटैक आने के बाद तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मड़ावरा लाया गया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया। उस समय मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर था और समय पर बेहतर उपचार मिलना अत्यंत आवश्यक था।
108 उपलब्ध नहीं थी, इसलिए LS एम्बुलेंस को किया फोन
मरीज के पुत्र एवं तामीरदार दीपेंद्र सिंह ने बताया कि उस समय 108 एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं थी। इसके बाद उन्होंने LS एम्बुलेंस सेवा से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि LS एम्बुलेंस विशेष रूप से गंभीर एवं आपातकालीन मरीजों को तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित की जाती है। ऐसे में उन्हें उम्मीद थी कि उनके पिता को बिना किसी देरी के जिला चिकित्सालय भेज दिया जाएगा।
चालक पर झूठी सूचना देकर गुमराह करने का आरोप
दीपेंद्र सिंह का आरोप है कि काफी देर तक एम्बुलेंस नहीं पहुंची। लगभग 30 मिनट बाद चालक ने स्वयं फोन कर बताया कि एम्बुलेंस पंचर हो गई है और दूसरी गाड़ी की व्यवस्था की जा रही है। हार्ट अटैक जैसे गंभीर मामले में यह सूचना मिलने के बाद परिजन दूसरी एम्बुलेंस की तलाश में जुट गए।
परिजनों का कहना है कि इस देरी के कारण मरीज की जान पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया। उनका आरोप है कि यदि दूसरी एम्बुलेंस समय पर उपलब्ध नहीं होती तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी।
40 मिनट बाद दूसरी एम्बुलेंस से भेजा गया जिला अस्पताल
आरोप है कि लगभग 40 मिनट से अधिक समय बीतने के बाद दूसरी 108 एम्बुलेंस की व्यवस्था हो सकी, जिसके माध्यम से मरीज को जिला चिकित्सालय भेजा गया। इस दौरान मरीज लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहा और परिजन हर पल उसकी जान को लेकर चिंतित रहे।
अस्पताल परिसर में सही हालत में खड़ी मिली LS एम्बुलेंस
घटना के बाद स्थानीय लोगों और पत्रकारों ने LS एम्बुलेंस की वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाई। आरोप है कि अस्पताल परिसर में LS एम्बुलेंस क्रमांक UP32EG6529 एक किनारे खड़ी मिली। मौके पर वाहन के चारों टायर पूरी तरह सही पाए गए और पंचर जैसी कोई स्थिति दिखाई नहीं दी। इसका वीडियो भी बनाया गया।
यदि जांच में यह तथ्य सही साबित होते हैं तो चालक द्वारा गाड़ी पंचर होने की सूचना देना अत्यंत गंभीर मामला माना जा सकता है। लोगों का कहना है कि जीवनरक्षक सेवा में तैनात कर्मचारी से इस प्रकार की कथित भ्रामक सूचना की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
GPS, कॉल रिकॉर्डिंग और CCTV जांच से सामने आ सकती है सच्चाई
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने मांग की है कि एम्बुलेंस की GPS लोकेशन, कंट्रोल रूम की कॉल रिकॉर्डिंग, अस्पताल परिसर के CCTV फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर तथा संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की विस्तृत जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना के समय एम्बुलेंस कहां थी और चालक ने परिजनों को क्या जानकारी दी।
दोषी मिलने पर कठोर कार्रवाई की मांग
क्षेत्रीय लोगों ने जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा उत्तर प्रदेश शासन से मांग की है कि यदि जांच में चालक द्वारा जानबूझकर झूठी सूचना देकर मरीज को समय पर एम्बुलेंस सेवा से वंचित करने की पुष्टि होती है तो उसके विरुद्ध तत्काल निलंबन, विभागीय कार्रवाई तथा लागू सेवा नियमों के अनुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
लोगों का कहना है कि जीवनरक्षक एम्बुलेंस सेवा सरकार की सबसे महत्वपूर्ण आपातकालीन सेवाओं में से एक है। यदि इस सेवा में तैनात कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करते या कथित रूप से गलत जानकारी देकर मरीजों को गुमराह करते हैं, तो इससे न केवल मरीजों का जीवन खतरे में पड़ता है बल्कि सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।
निष्पक्ष जांच से ही तय होगी जिम्मेदारी
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोष तय किया जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो ऐसी कार्रवाई की जाए जो भविष्य में किसी भी कर्मचारी को जीवनरक्षक सेवाओं के साथ लापरवाही करने से रोके। लोगों ने यह भी मांग की कि जांच पूरी होने तक संबंधित चालक को एम्बुलेंस संचालन के कार्य से अलग किया जाए, ताकि जांच निष्पक्ष ढंग से पूरी हो सके।
संपादकीय सावधानी: इस समाचार में चालक के संबंध में लगाए गए आरोप परिजनों एवं स्थानीय लोगों के कथनों पर आधारित हैं। इन आरोपों की पुष्टि सक्षम प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी। समाचार का उद्देश्य जांच की मांग और सामने आए आरोपों को तथ्यात्मक रूप से प्रस्तुत करना है।
रिपोर्ट – आर. के. पटेल (ललितपुर)
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