
कटिहार (बिहार)।
बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से इन दिनों संगठन सृजन अभियान और संगठन सृजन साथी कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
प्रदेश नेतृत्व लगातार विभिन्न जिलों का दौरा कर रहा है। इसका उद्देश्य संगठन को पंचायत से लेकर प्रदेश स्तर तक मजबूत बनाना है। हालांकि इस अभियान के बीच कटिहार कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केवल बैठकों और दौरों से संगठन मजबूत नहीं होता। संगठन को मजबूत बनाने के लिए कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच समन्वय भी जरूरी होता है। कटिहार कांग्रेस में लंबे समय से गुटबाजी और खेमेबाजी की चर्चा होती रही है।
संगठन सृजन अभियान के सामने बड़ी चुनौती
कटिहार कांग्रेस में कई स्तरों पर अलग-अलग गुट सक्रिय बताए जाते हैं। ऐसे में संगठन विस्तार की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि संगठन के भीतर संवाद और अनुशासन मजबूत नहीं होगा, तो अभियान का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा।
कांग्रेस का इतिहास काफी पुराना और गौरवशाली रहा है। इसके बावजूद जिला स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच एकजुटता की कमी महसूस की जा रही है। कई कार्यकर्ता निजी समूहों और अलग-अलग धड़ों में बंटे दिखाई देते हैं।
एकजुटता के बिना मुश्किल होगा लक्ष्य हासिल करना
संगठन को प्रभावी बनाने के लिए सभी स्तरों पर सामंजस्य आवश्यक माना जाता है।
वहीं कटिहार कांग्रेस में कई बार वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद की खबरें भी सामने आती रही हैं। इससे संगठनात्मक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका बनी रहती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रदेश नेतृत्व के दौरे से कार्यकर्ताओं में उत्साह जरूर बढ़ता है।
हालांकि स्थायी परिणाम तभी मिलेंगे, जब संगठन के भीतर मौजूद मतभेद कम होंगे और कार्यकर्ता एकजुट होकर काम करेंगे।
फिलहाल संगठन सृजन अभियान जारी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि कांग्रेस नेतृत्व कटिहार में संगठनात्मक चुनौतियों को किस तरह दूर करता है और अभियान को जमीनी स्तर पर कितना सफल बना पाता है।
रिपोर्ट – प्रीतम चक्रवर्ती
पूर्णिया प्रमंडल प्रभारी
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